हार्ट अटैक के लक्षण और कारण, इससे बचने के लिए क्या करे - Baba Ramdev Tips

हार्ट अटैक के लक्षण और कारण, इससे बचने के लिए क्या करे - Baba Ramdev Tips


नमस्कार दोस्तों, आजकल  की  इस व्यस्त लाइफस्टाइल में खुदके लिए, अपने स्वास्थ्य के लिए, समय पर खानपान के लिए समय निकलना बहुत ही कठिन हो गया है | और यही कारण है की इस व्यस्तता  का असर हमारे दिल पर एवं स्वास्थ्य पर पड़ रहा है जिसकी वजह से बाद में आपको बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है|




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हम लोग जो फिल्मे देखते है उन फिल्मों में हार्ट अटैक का दृश्य पूरे ड्रामे के साथ दिखाया जाता है, व्यक्ति को दिल में दर्द होता है, वो छाती पर हाथ रखकर कुछ देर कराहता है और फिर नीचे गिर जाता है। ज़रुरी नहीं कि हर किसी को हार्ट अटैक फिल्मों के ड्रामाभरे अंदाज़ में आए। इसलिए हार्ट अटैक के सही लक्षणों के बारे में जानना ज़रुरी है, ताकि असल ज़िंदगी में आए हार्ट अटैक को समय रहते पहचाना जा सके।

हृदय रोगों से बचने के उपाय 

हमारे शरीर के हर मांसपेशी को काम करने के लिए रक्त की जरूरत पड़ती है, हृदय पूरे शरीर में रक्त वाहिकाओं और धमनियों के ज़रिए रक्त पहुंचाता है । लेकिन हृदय को भी काम करने के लिए उस तक रक्त का पहुंचना बहुत जरुरी होता है और हृदय तक रक्त पहुँचाने का काम कोरोनरी धमनियाँ करती हैं। यदि कोरोनरी धमनी प्लाक बनने के कारण अवरुद्घ हो जाएँ तो इससे हार्ट अटैक आ सकता है।

Baba Ramdev के अनुसार हार्ट अटैक आने के कारण:

 - बड़ा हुआ वजन ।
 -शारीरिक श्रम की कमी।
 -अधिक वसा व कोलेस्ट्रॉलयुक्त खाना।
 -तनाव एवं धूम्रपान।

 -अधिक शराब का सेवन ।
 -परिवार के अन्य सदस्यों को हार्ट अटैक की समस्या।


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ये कुछ ऐसे कारण हैं, जो प्लाक बनने की प्रक्रिया यानी आर्थेरोस्क्लेरॉसिस को बढ़ावा देते हैं। धीरे-धीरे जमा हो रहे इस प्लाक के कारण अंततः धमनी अवरुद्घ हो जाती है, नतीजा होता है हार्ट अटैक। धमनी के अवरुद्घ होते ही हृदय तक खून की आपूर्ति बंद हो जाती है। जिससे आदमी की मृत्यु भी हो सकती है



हार्ट अटैक आने पर सामान्यतः इन लक्षणों को देखा जाता है -

 - ज्यादा पसीना आना

 -साँस जल्दी फूलना।
 - सीने में दर्द एवं ऐठन होना ।
 -हाथों, कंधों, कमर या जबड़े में दर्द होना।
 -मितली आना, उल्टी होना।


जब महिलाओ को हार्ट अटैक आता है तो कुछ अन्य लक्षण भी देखे जा सकते है:


-त्वचा पर चिपचिपाहट,

-उनींदापन,

-सीने में जलन महसूस होना और

-असामान्य रूप से थकान इसमें शामिल है।


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हार्ट अटैक कई लोगों के लिए मृत्यु का कारण बनता है। इससे मरने वाले करीब एक तिहाई मरीज़ों को तो यह पता ही नहीं होता कि वे हृदय रोगी हैं और अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। इसके लिए ज़िम्मेदार एक बड़ा कारण यह है कि पहले आए हार्ट अटैक को मरीज़ ने पहचाना ही न हो



"साइलेंट" हार्ट अटैक

कभी-कभी लोगों को हार्ट अटैक होता है और उन्हें इसका पता भी नहीं चलता। हार्ट अटैक के लक्षण दिखाई नहीं देना, मरीज़ द्वारा लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देना या फिर इन्हें समझ ही न पाना साइलेंट हार्ट अटैक के कारण हैं। हार्ट अटैक से उबरने के लिए अवरुद्घ रक्त प्रवाह को जल्द से जल्द शुरु करना सबसे ज़्यादा ज़रुरी है। चूँकि साइलेंट हार्ट अटैक में मरीज़ या उसके परिजनों को इसका पता ही नहीं चल पाता, इसलिए उन्हें उबरने का कोई मौका भी नहीं मिलता। यही कारण है कि साइलेंटहार्ट अटैक ज़्यादा घातक होते हैं। हृदय तक रक्त की आपूर्ति कुछ देर के लिए बंद हो जाए तो मरीज़ को सीने में दर्द या एंजाइना की तकलीफ होती है। यह असल में एक चेतावनी की तरह होता है, जो इस ओर इशारा करता है कि स्थिति सामान्य नहीं है।

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यहाँ पर भी ध्यान न दें तो स्थिति को बद से बदतर होते देर नहीं लगेगी। एंजाइना का लक्षण होता है सीने में दर्द उठना, लेकिन कई मरीज़ों को इसका पता ही नहीं चल पाता यानी उन्हें साइलेंट एंजाइना हो जाता है। यह आगे चलकर साइलेंट हार्ट अटैक का कारण बनता है। हार्ट अटैक के लक्षणों को कभी-कभी मरीज़ समझ ही नहीं पाता। इन लक्षणों को वो एसिडिटी, थकान, तनाव, घबराहट या ऐंठन जैसी छुटपुट समस्या समझ बैठता है और परिजनों या चिकित्सक को बताना उचित नहीं समझता। उसे लगता है कि थोड़ी देर में दर्द अपने आप ही कम हो जाएगा, लेकिन यह दर्द जानलेवा हो जाएगा, यह तथ्य उनके ज्ञान से परे होता है।


दिल के दौरे में खून की जांच

दिल का दौरा सुनते ही आँखों के सामने ज़्यादातर दर्द से तड़पते, पसीने से तरबतर हाँफते-घबराते व्यक्ति की तस्वीर आती है। ऐसी स्थिति में मरीज़ को तुरंत चिकित्सकीय देखरेख की आवश्यकता होती है। चिकित्सक सबसे पहले आवश्यक जाँच करते हैं और ई.सी.जी. व संभव हो तो ईको की जाँच भी करते हैं। इसके आधार पर वे तुरंत ही निदान करते हैं कि मरीज़ को दिल का दौरा पड़ा है या नहीं?

मरीज़ों में दिल के दौरे का निदान ज़्यादातर इन्हीं दो जाँचों के आधार पर किया जाता है। कभी-कभी इन जाँचों के लिए मशीन या इनके संचालन के लिए कुशल चिकित्सक के अभाव में दिल के दौरे का इलाज शुरू कर दिया जाता है। खून की जाँच से भी इस बात का पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति को दिल का दौरा वास्तव में पड़ा था या नहीं?



थकान एवं कमजोरी दूर करने के आसान घरेलु उपाय

किसी भी बीमारी में अगर वक्त पर सही इलाज मुहैया हो जाए तो मरीज की जिंदगी बचने के चांस काफी बढ़ जाते हैं। हार्ट अटैक के मामले में यह और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि यहां कई बार कुछ मिनटों की देरी भी भारी पड़ जाती है। इसलिए,आइए अब जानते हैं कि हार्ट अटैक के लक्षण होने पर क्या करना चाहिएः

घरेलू इलाज की बजाय हॉस्पिटल पहुंचें 


जब किसी मरीज को चेस्ट पेन होता है, तो उसे अमूमन यह यकीन नहीं होता कि इसकी वजह हार्ट अटैक हो सकती है। वह समझता है कि यह दर्द किसी दूसरी वजह मसलन, एसिडिटी, गैस, मांसपेशियों में खिंचाव, नर्व्स में चुभन वगैरह से हो रहा है। ज्यादातर मरीज इस तरह के लक्षणों में घरेलू इलाज को तरजीह देते हैं और उससे बेहतर होने की उम्मीद भी बांधे रहते हैं। ऐसा देखा गया है कि एक आम आदमी ऐसी स्थितियों में हमेशा हॉस्पिटल जाने से बचता है और इस तरह देरी बढ़ती जाती है। यह गलत है। 

जब किसी को हार्ट अटैक आए, तो उसे फौरन हॉस्पिटल पहुंचाना चाहिए ताकि उसे जल्द-से-जल्द अटैक से रिकवर करने में मदद मिले।


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डॉक्टरों की खोजबीन में समय नष्ट न करें 


अटैक के बाद पेशंट का एंजियोग्राम कराया जाता है। अगर उसके नतीजे बताते हैं कि उसकी एक या एक से ज्यादा धमनियों में ब्लॉकेज है तो डॉक्टर सलाह देते हैं कि उसे सर्जरी करा लेनी चाहिए। लेकिन पेशंट डॉक्टर की सलाह पर अमल करने की बजाय दूसरे डॉक्टरों के चक्कर काटना शुरू कर देते हैं, ताकि वे सर्जरी से बच सकें। इस बीच उनका काफी समय बर्बाद हो जाता है, जो उनके लिए घातक भी साबित हो सकता है। 


पेशंट की कंडिशन से तय होगा ट्रीटमेंट 


एक आम आदमी का कार्डियोलॉजिस्ट से हमेशा यह सवाल होता है कि वह बाईपास सर्जरी कराए या स्टेंट डलवाए और इसके लिए वह एक हॉस्पिटल से दूसरे हॉस्पिटल अपनी रिपोर्ट लेकर चक्कर काटता है। बाईपास सर्जरी में खून के बहाव का रास्ता नए चैनल के जरिए बदल दिया जाता है, जिससे धमनियों के ब्लॉकेज बाईपास हो जाते हैं। स्टेंट ब्लॉकेज को खेलने में मदद करते हैं। पेशंट की कंडिशन देखने के बाद डॉक्टर राय देते हैं कि उसके लिए क्या मुफीद होगा। खुद जिद न करें कि बाईपास करवाएं या स्टेंट डलवाएंगे। 




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